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12-13-14 नवम्‍बर, भोपाल, मध्‍यप्रदेश, भारत

'राष्‍ट्र सर्वोपरि' विचारकों एवं कर्मशीलों का राष्‍ट्रीय विमर्श

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पृष्ठभूमि

भारत के पास ज्ञान, परम्परा, आचार-विचार, लोक-संवाद और शास्त्रार्थ जैसी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण धरोहरें हैं। कई सदियों से भारत ने बिखराव की स्थितियों का सामना किया और राजनैतिक तथा सामाजिक क्षरण का शिकार भी हुआ; जिसका प्रभाव सामाजिक और धार्मिक मूल्यों के साथ-साथ भारत की ज्ञान परम्परा, विद्या और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा, लेकिन हमारा राष्ट्रीय मानस, धार्मिकता, आस्था, विश्वास, राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी स्थिति में भी लगातार अक्षुण्ण बनी रही, क्योंकि भारतीय संस्कृति ने हमें एक सूत्र में बाँधे रखा। शताब्दियों से भारतीय संस्कृति ही हम करोड़ों भारतीयों को एक सूत्र में बाँधे हुए है। संस्कृति हमेशा जोड़ने का काम करती है, भारतीय संस्कृति में तो यह गुण अपार और अथाह है। वर्तमान समय में भारतीय विचारकों, चिन्तकों, स्वप्नद्रष्टा-संघर्षशील नेताओं ने हमें आत्मविश्वास से परिपूर्ण एक महान राष्ट्र बनाने के लिए तैयार किया है।

लोकमंथन, ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ (Nation First) की सघन भावना से ओतप्रोत विचारकों, अध्येताओं और शोधार्थियों के लिए संवाद का मंच है, जिसमें देश के वर्तमान मुद्दों पर विचार-विमर्श और मनन-चिन्तन किया जायेगा। हम जानते ही हैं कि परस्पर संवाद एक ऐसा मंत्र है, जिसमें मनुष्यता के उत्कर्ष के सभी आयाम खुलते हैं। लोकमंथन के माध्यम से यह विश्वास सहज ही बनता है कि इसमें शामिल हो रहे बुद्धिजीवियों, चिन्तकों, मनीषियों, अध्येताओं के परस्पर विचार-विमर्श से भारत के साथ विश्व को नई दृष्टि मिलेगी। यह तीन दिवसीय विमर्श गहरी वैचारिकता की वजह से हमारे राष्ट्र के उन्नयन में सहायक सिद्ध होगा। समता, संवेदनात्मकता, प्रगति, सामाजिक न्याय, सौहार्द्र और सद्भाव की आकांक्षा राष्ट्रीयता के मूलमंत्र है। इसी भावना के साथ सामाजिक बदलाव और समाज का विकास इस राष्ट्रीय विमर्श का मूल उद्देश्य है। युवा अध्येताओं, विचारकों, विद्वानों के विचार हमारे समाज के संवर्धन में जुड़ सकें, इसका हरसम्भव प्रयत्न इस राष्ट्रीय अधिवेशन में किया जा रहा है।

कला, साहित्य, मीडिया और सिनेमा ने हमारे देश के व्यक्ति और समाज के मानस को नया रूप दिया है। अकादमिक अध्यवसाय, अन्वेषण और अर्थव्यवस्था की समृद्धि ने वैश्विक स्तर पर हमारी साख में अभिवृद्धि की है। हमारे युवा चिन्तकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, कला-संस्कृति विशेषज्ञों ने पूरी दुनिया में अपनी सम्मानजनक उपस्थिति दर्ज की है। युवा अध्येताओं, सृजकों एवं शोधार्थियों की पीढ़ी ने आधुनिक भारत बनाया है। राष्ट्रीय भावना का हमारे युवा सर्जकों-चिन्तकों ने लगातार उत्कर्ष किया है। यह राष्ट्रीय विमर्श देश के अध्येताओं, विचारकों, सर्जकों, शोधार्थियों की सामूहिक बुद्धिमत्ता और विवेकपूर्ण सहभागिता से हमारे राष्ट्रीय चरित्र को आलोकित करेगा तथा भविष्य के भारत के लिए नई सोच एवं नई ऊर्जा का संचार करेगा, जो कि भारत के गौरवशाली अतीत की परम्पराओं पर आधारित होने के साथ ही सनातन और नितनूतन भी होगा।

विमर्श के बिंदु

  • राष्ट्रीयता की संकल्पना और अवधारणा।
  • औपनिवेशिकता से भारतीय मानस की मुक्ति।
  • नवउदारीकरण और भूमण्डलीकरण में राष्ट्रीयता।
  • राष्ट्रीय अस्मिता, आकांक्षा और राष्ट्रीय अखण्डता।
  • राष्ट्र निर्माण में कला, संस्कृति, इतिहास और मीडिया की भूमिका।

संगोष्ठी के उद्देश्य

  • प्रतिभाशाली युवा विचारकों, शोधार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कलाकारों को समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच पर एकत्रित करना, जिससे अपनी देशज विचार परम्पराओं को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिए चिन्तन- मननशील मानस बन सके।
  • संचार माध्यम, मीडिया, कला आदि के द्वारा विभाजक प्रवृत्तियाँ अपनी उपस्थिति लगातार बढ़ा रही हैं। उसके लिए राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ प्रतिरोध का वातावरण विकसित करना। कला, साहित्य, मीडिया आदि अनुशासनों में राष्ट्रीय चरित्र एवं राष्ट्रीय भावना को सुदृढ़ धरातल प्रदान करना।
  • विमर्श के माध्यम से भारत को महान राष्ट्र बनाने के लिए पारस्परिक विचारशीलता को विकसित करना और प्रजातांत्रिक सोच के साथ संवादधर्मिता को बढ़ाना, जिससे लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, परस्पर सामंजस्य की भावना तथा संस्कृति और अर्थव्यवस्था समृद्धशाली हो सके और भारत महान राष्ट्र बन सके।

प्रतिभागी

  • अकादमिक विशेषज्ञ।
  • बुद्धिजीवी व लेखक।
  • राजनेता।
  • नीति-निर्माता।
  • पत्रकार व मीडियाकर्मी।
  • कलाकार और सिनेकर्मी।
  • सामाजिक कार्यकर्ता।
  • उद्योगपति और उद्योग विशेषज्ञ।
  • विद्यार्थी और महिलाएँ।

प्रतिभागिता की प्रासंगिकता

लोकमंथन प्रतिभागियों को अंतर्राष्ट्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित विचारकों, शोधार्थियों, कलाकारों एवं कर्मशीलों के साथ तल्लीन और तन्मय होकर विमर्श करने हेतु मंच उपलब्ध कराता है।

विमर्श में अपेक्षित वक्ता एवं अभ्यागतों की सूची वेबसाइट पर प्रदर्शित है। यह विमर्श नए लोंगों से मिलने, नए विचारों को साझा करने तथा प्रतिभागियों को सक्रिय चर्चाओं में भाग लेने का अवसर है। इस विमर्श में प्रतिभागिता से नए प्रश्नों का उद्भव होगा तथा अपने देश के समक्ष समसामायिक विषयों के संबंध में समझ बढ़ेगी।

प्रतिभागियों को निर्धारित किए गए दिनांक, समय तथा स्थल पर अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का भी अवसर मिलेगा। यह प्रदर्शन संगीत, नृत्य, नाट्यकला, अभिनय, लोककला, कविता पाठ तथा हर प्रकार के कला प्रदर्शन हो सकते हैं।

विषय-वस्तु

संगोष्ठी के समानान्तर सत्र

प्रथम दिवस

समय विषय
10:00 - 11:45 उद्घाटन
विषय-वस्तु
राष्ट्रीयता की अवधारणा
परि-सत्र
12:15 - 01:30 औपनिवेशिकता से भारतीय मानस की मुक्ति
समानान्तर सत्र
02:30 - 04:00 औपनिवेशिक मानसिकता का साहित्य पर प्रभाव
02:30 - 04:00 औपनिवेशिक प्रवृत्तियों का समाजविज्ञान एवं मानविकी में प्रभाव
02:30 - 04:00 राजनीतिक विमर्श में उपनिवेशिकता
02:30 - 04:00 कला-संस्कृति के क्षेत्र में औपनिवेशिक मानसिकता
02:30 - 04:00 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में उपनिवेशिकता का प्रभाव
02:30 - 04:00 सामाजिक जीवन में औपनिवेशिक मानसिकता
पैनल चर्चा
02:30 - 04:00 स्वस्थ और संपूर्ण जीवन शैली
आगे...
04:30 - 06:00 सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
06:30 - 08:00 सामूहिक - शास्त्र सभा
08:00 - 09:00 रात्रि भोज
09:00 - 10:30 सामूहिक - सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

द्वितीय दिवस

परि-सत्र
09:30 - 11:00 नवउदारीकरण और भूमंडलीकरण में राष्ट्रीयता
समानान्तर सत्र
11:30 - 01:00 राष्ट्रीयता- आधुनिकता का विरोध नहीं
11:30 - 01:00 आधुनिकता की अवधारणा एवं जीवन शैली
11:30 - 01:00 भारत की भू-राजनीति एवं वर्तमान वैश्विक परिदृश्य
11:30 - 01:00 स्वदेशी अर्थव्यवस्था, औद्योगीकरण तथा धारणक्षम विकास
11:30 - 01:00 राष्ट्रीयता में संस्कृति, लोक परंपरा और उपासना पद्धति की स्थिति
परि-सत्र : राष्ट्रीय अस्मिता एवं अन्य पहचानों का समायोजन
समानान्तर सत्र
04:00 - 05:30 जाति, भाषा पंथ, क्षेत्र तथा वर्ग जैसी पहचान के आधार पर शोषण
04:00 - 05:30 महिला शक्ति- भारत और पश्चिम (अतीत से वर्तमान, पाश्चात्य महिला विमर्श एवं परिवार की संकल्पना)
04:00 - 05:30 दलित और वंचित आख्यान में बदलाव (दलित पहचान, दलित साहित्य, दलित मीडिया एवं व्यवसाय, भारतीय दलित आंदोलन एवं पश्चिम का नस्लभेद
04:00 - 05:30 पूर्वोत्तर- वर्तमान परिदृश्य एवं संभावनाएं
04:00 - 05:30 जम्मू, कश्मीर एवं लद्दाख का वर्तमान परिदृश्य और विदेशी हस्तक्षेप का प्रभाव
पैनल चर्चा
04:00 - 05:30 लोकतंत्र में लोक का स्थान और भूमिका- सहभागिता और विकेन्द्रीकरण का अनुभव
आगे...
07:00 - 08:30 सामूहिक - अष्टध्वनि
09:00 - 10:30 सामूहिक प्रस्तुति - कथकली, कलारी, तेरियम
09:00 - 10:30 रात्रि भोज

तृतीय दिवस

समय विषय
परि-सत्र
09:30 - 11:00 राष्ट्र निर्माण में कला, संस्कृति, इतिहास और मीडिया की भूमिका
समानांतर सत्र
11:30 - 01:00 संस्कृति, कला और साहित्य - वर्तमान और अपेक्षाएं
11:30 - 01:00 चित्रकला, लोककला एवं परंपराएं- बदलता परिदृश्य
11:30 - 01:00 मीडिया की वर्तमान प्रवृत्तियां - रचनात्मक पत्रकारिता की आवश्यकताएं
11:30 - 01:00 भारत का अकादमिक जगत और उसके वैश्विक सम्बन्ध
11:30 - 01:00 इतिहास लेखन की दृष्टि और भविष्य की दिशाएं
11:30 - 01:00 फिल्म, लोककला का बदलता परिदृश्य
11:30 - 01:00 सोशल मीडिया एवं नया समाज
विदाई समारोह
02:00 - 03:30 लोकमंथन - 2016 (रिपोर्ट)
02:00 - 03:30 घोषणापत्र
02:00 - 03:30 मुख्य अतिथि

KEY SPEAKERS & VISITORS

  • Acharya David Frawley
  • Shri Rajiv Malhotra
  • Shri Tarek Fateh
  • Shri Ram Madhav
  • Sh. Tufail Ahmad
  • Prof. Rakesh Sinha
  • Smt. Smriti Irani
  • Sh. Anupam Kher
  • Shri S. Gurumurthy
  • Sh. Bibek Debroy
  • Prof. Makarand Paranjape
  • Sh. Chandra Prakash Dwivedi
  • Sh. D.D.Pathak
  • Sh. Madhur Bhandarkar
  • Smt. Malini Awasthi
  • Mr. Richard Hay
  • Smt. Zakia Soman
  • Ms. Shefali Vaidya
  • Sh. Hindol Sengupta
  • Swami Mitranand Ji
  • Moulana Syed Athar Hussain Dehlvi
  • Ms. Advaita Kala
  • Prof. Gautam Sen
  • Ms. C.K.Janu
  • Dr. Kaushal Panwar
  • Shri Mukesh Bharadwaj
  • Dr. Nani Gopal Mahanta
  • Shri C Issac
  • Shri Sanjay Paswan
  • Smt. Sonal Mansingh
  • Smt. Pragya Tiwari
  • Shri Ashok Modak
  • Prof. Kapil Tiwary
  • Sh. Sudipto Sen
  • Sh. Shahid Sidiqi

सम्पर्क

लोकमंथन - 2016

'राष्‍ट्र सर्वोपरि' विचारकों एवं कर्मशीलों का राष्‍ट्रीय विमर्श

स्‍थान: विधान सभा परिसर, भोपाल (मध्य प्रदेश), भारत
परिसंवाद की तिथियाँ: 12-13-14 नवम्बर, 2016.
ई-मेल: lokmanthan2016@gmail.com